Chhattisgarh Election 2023: वरिष्ठ आदिवासी नेता अरविंद नेताम ने छोड़ी कांग्रेस, प्रदेश नेतृत्व पर लगाए ये आरोप

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Chhattisgarh Election 2023- कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी नेता अरविंद नेताम (Arvind Netam) ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress) और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेजा है. नेताम ने कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व पर कई आरोप भी लगाए हैं. बता दें कि नेताम सर्व आदिवासी समाज (Sarva Adivasi Samaj) के संरक्षक हैं. वे इंदिरा और नरसिम्हा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं.

अरविंद नेताम ने अपने पत्र में लिखा, “मैं कांग्रेस पार्टी का क्रियाशील सदस्य हूं. पांच साल पूर्व तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के आह्वान पर कांग्रेस में वापस आकर अपने अनुभव से पार्टी को मजबूती प्रदान करने का हमेशा प्रयास किया लेकिन प्रदेश नेतृत्व के असहयोग रवैये के कारण मुझे निराशा हुई.”

उन्होंने आगे लिखा कि प्रदेश नेतृत्व राज्य में आदिवासी समाज के लिए बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर के द्वारा प्रदान संवैधानिक अधिकारों के विपरीत काम करने और पेसा कानून 1996 में आदिवासी समाज को जल, जंगल, जमीन में ग्रामसभा के अधिकारों को समाप्त कर दिया गया है, इस प्रकार से आदिवासी विरोधी सरकार है.

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पत्र में उन्होंने कहा, “अतः मैं आज विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पार्टी के प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दे रहा हूं. केन्द्रीय नेतृत्व से मुझे हमेशा मार्गदर्शन एवं आर्शीवाद मिलता रहा है, उसके लिए पार्टी का आभार व्यक्त करता हूं.”

कौन हैं अरविंद नेताम?

सर्व आदिवासी समाज (Sarva Adivasi Samaj)  के संरक्षक अरविंद नेताम (Arvind Netam) प्रदेश के दिग्गज आदिवासी नेता माने जाते हैं. उनके संगठन ने आगामी छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में 90 विधानसभा सीटों में से 50 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का भी ऐलान किया है. चार बार के सांसद अरविंद नेताम इंदिरा गांधी और नरसिम्हा राव सरकार में भी मंत्री रहे हैं. ये पहली बार नहीं है जब उन्होंने कांग्रेस को अलविदा बोला है बल्कि 1996 में भी उन्होंने कांग्रेस छोड़ी थी और फिर 1998 में पार्टी में लौट आए थे. वहीं 2012 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान आदिवासी नेता पीए संगमा का समर्थन किया तो उन्हें फिर से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. हालांकि 2018 में नेताम ने दोबारा कांग्रेस प्रवेश किया था. नेताम बसपा और राकांपा जैसी पार्टियों के साथ भी अपनी सियासी पारियां खेल चुके हैं.

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