Charchit Chehra: दिल्ली दंगे के मुख्य आरोपी उमर खालिद की ढाल बनी बनोज्योत्सना लाहिरी कौन हैं?

Charchit Chehra Banojyotsana Lahiri: दिल्ली दंगे के मामले में UAPA के तहत 5 साल से अधिक समय से जेल में बंद उमर खालिद की पार्टनर बनोज्योत्सना लाहिरी इन दिनों चर्चा में हैं. चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में जानिए कैसे 5 साल से जेल में बंद उमर के लिए वह ढाल बनकर खड़ी हैं, कैसे शुरू हुई दोनों की लव स्टोरी और क्यों चर्चा में रहती हैं बनोज्योत्सना.

Umar Khalid's partner Banajyotsna Lahiri profile
उमर खालिद के लिए ढाल बनकर खड़ी है बनोज्योत्सना लाहिरी
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JNU का एक छात्र 5 सालों से भी ज्यादा समय से जेल की सलाखों के पीछे है और वो कोई नहीं बल्कि उमर खालिद है. जिस मामले में उमर जेल में हैं वो कोई छोटे-मोटे आरोप नहीं बल्कि UAPA के तहत यानी देश विरोधी होने के लगे हैं. पहले लोउर कोर्ट, फिर दिल्ली हाई कोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उमर खालिद और उनके साथी शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी. केस को 5 साल से ज्यादा हुए, न ट्रायल शुरू हुआ, न जमानत मिली. उमर खालिद जेल में दिल्ली दंगे के केस में बंद हैं और अब अगले एक साल के लिए जमानत के लिए अर्जी भी नहीं लगा सकते.

2020 से 2026 आ गया ऐसे में उमर के परिवार के अलावा अगर कोई उनके साथ खड़ा है तो वो उनकी पार्टनर बनोज्योत्सना लाहिरी हैं. गर्लफ्रेंड हम नहीं बोल रहे क्योंकि उमर और खालिद भी प्यार के रिश्ते में पार्टनर्शिप में विश्वास करते हैं, इसलिए हम इन्हें पार्टनर ही कहते हैं. दोनों के प्यार के बॉन्ड की कहानी भी जानने लायक है और यह दुनिया के लिए मिसाल है.

चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में आज जानेंगे कौन हैं बनोज्योत्सना लाहिरी, कैसे हुई उमर से उनकी पहली मुलाकात, कैसे जोहरान के खत का जिक्र कर हुई वायरल और आखिरी मुलाकात में उमर की कही बात बताकर कैसे बनीं खबरों की हेडलाइन...

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उमर और बनोज्योत्सना की लव स्टोरी

5 साले से दिल्ली की तिहाड़ जेल से एक लव स्टोरी चल रही है, जिसके हीरों हैं उमर खालिद और उनकी पार्टनर बानोज्योत्सनी लाहिरी. उमर के लिए बनोज्योत्सना का प्यार ऐसा है कि उमर की कही हुई बात वो खुद दुनिया के सामने रखती हैं. न्यू यॉर्क के नए मेयर जोहरान ममदानी की लिखा लेटर हो या सुप्रीम कोर्ट से उमर की जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उमर के शब्द, सब जगजाहिर बनोज्योत्सना ने ही किया. जेल में हफ्ते की एक मुलाकात, कांच की दीवार और इंटरकॉम पर बातचीत...कुछ ऐसी ही जिंदगी बनोज्योत्सना और उमर दोनों की है.

दोनों मिलकर रोते कम हंसी-मजाक ज्यादा करते हैं, क्योंकि दोनों ही नहीं चाहते कि जरा सी देर की इस मुलाकात को रो-धो कर बर्बाद किया जाए. 2023 में उमर से अपनी इन्हीं मुलाकातों का किस्सा बनोज्योत्सना ने India Love Project को बताई थी. ये एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो प्यार को धर्म, जाति और पहचान की दीवारों से आजाद करके दिखाता है. उमर मुस्लिम समुदाय से आते हैं जबकि बनोज्योत्सना हिंदू बंगाली परिवार से आती है.

उमर की ढाल बनकर खड़ी है बनोज्योत्सना

इंडिया लव प्रोजेक्ट से हुई अपनी इस बातचीत में बनोज्योत्सना ने उमर से हुई अपनी मुलाकातों का जिक्र कर बताया था कि उनकी मुलाकात हफ्ते में सिर्फ एक बार होती है. हम मिलते हैं और इस बीच हम हंसते हैं, मजाक करते हैं, जानबूझकर उदास बातें नहीं करते लेकिन उदासी तब आती है, जब मैं अकेले बाहर निकलती हूं. उन्होंने आगे कहा कि, फिर जब कोर्ट में आमने-सामने मिलते हैं, तो बातें इशारों में होती है, हंसी मजाक भी कुछ ऐसे ही होता है.

एक किस्सा बनोज्योत्सना ने सुनाते हुए कहा कि मैंने उससे कहा था कि तुम्हारा हेयरकट बहुत स्टूपिड है, जिस पर उसने तुरंत पलटकर कहा तुम्हारे मैसी का भी हेयरकट ऐसा ही है. इस पर बानो उमर को औकात में रहने की सलाह दे डालती हैं. दोनों की खेल को लेकर पसंद अलग-अलग है और खेल को लेकर दोनों की नोकझोंक हो जाती है, लेकिन किताबों को लेकर उनका रिश्ता बिल्कुल एक जैसा है. जेल में उमर ने जो किताबें अब तक पढ़ी हैं, उन्हें रखने के लिए घर में अलमारियां भी खरीदी. उमर जेल में हैं, तब बनोज्योत्सना उनके लिए एक ढाल बनकर खड़ी हैं, वो उमर की हर तारीख पर अदालतों के चक्कर भी संभालती हैं और रोजमर्रा की जिंदगी भी.

बनोज्योत्सना ही देती है उमर को सारी जानकारी

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद वो बनोज्योत्सना ही थीं जिन्होंने बताया कि जब 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में बाकी 5 आरोपियों को जमानत मिली तो उमर ने खुशी जाहिर की. बनोज्योत्सना के जेल मिलने आने की बात पर उमर ने इमोशनल होकर कहा कि हां ठीक है आ जाना अब तो यही जिंदगी है. इससे पहले जोहरान ममदानी के लिखे लेटर को भी बनोज्योत्सना ने ही सोशल मीडिया पर शेयर किया था, जिसमें जोहरान उमर के लिए लिखते हैं- Dear Umar, I think of your words on bitterness often, and the Importance of not letting it consume one's self. It was a pleasure to meet your parents. We are all thinking of you.

हिंदी में अनुवाद करें तो, मैं अक्सर तुम्हारे उन शब्दों को याद करता हूं जिनमें तुमने कड़वाहट को खुद पर हावी न होने देने की बात कही थी. तुम्हारे माता-पिता से मिलकर खुशी हुई, हमें तुम्हारी चिंता है. लेटर में जोहरान जिस मुलाकात का जिक्र कर रहे हैं वो दिसंबर 2025 में हुई जब उमर खालिद के माता पिता अमेरिका गए थे जहां उन्होंने जोहरान ममदानी से मुलाकात की थी.

कैसे शुरु हुई दोनों की लव-स्टोरी?

बनोज्योत्सना और उमर की पहली मुलाकात 2008 में हुई थी. उमर तब दिल्ली यूनिवर्सिटी से BA कर रहे थे और बनोज्योत्सना JNU से MPhil. जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों के समर्थन में हुए एक प्रदर्शन में दोनों मिले. वक्त के साथ दोनों की सोच मिलती चली गई और इसी के चलते दोनों करीब आते चले गए फिर 2013 में दोनों ने साथ चलने का फैसला किया. 

कौन है बनोज्योत्सना लाहिरी?

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जन्मी बनोज्योत्सना लाहिरी एक पढ़ी लिखी फैमिली से आती हैं, घर का माहौल भी कुछ ऐसी ही है. बनोज्योत्सना पेशे से एक सामाजिक रिसर्चर और राइटर हैं. वो सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज में सीनियर रिसर्चर हैं, दिल्ली यूनिवर्सिटी के में गेस्ट लेक्चरर के तौर पर पढ़ाती हैं और JNU से पीएचडी कर चुकी हैं. बनोज्योत्सना का मानना है कि जब आप मुश्किल की घड़ी में साथ होते हैं तो आप अपने पार्टनर के और करीब आ जाते हैं और यही आपकी ताकत भी है. वैसे परिवार भी इस रिश्ते की ताकत है, जहां बनोज्योत्सना के माता-पिता उमर पर गर्व करते हैं, और उमर के माता-पिता उन्हें अपनी बेटी जैसा प्यार देते हैं.

उमर खालिद पर क्या है आरोप?

2016 में उमर खालिद का नाम सबसे पहले चर्चा में आया था. दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में देश विरोधी नारा देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद अपनी सफाई में एक बयान दिया कि मेरा नाम उमर खालिद जरूर है, लेकिन मैं आतंकी नहीं हूं. इस मामले में उन्हें बाद में जमानत भी मिल गई लेकिन तभी से बीजेपी ने उन लोगों को कहना शुरू किए टुकड़े-टुकड़े गैंग जिनकी विचारधारा देश के खिलाफ जाती दिखी. 

फिल्हाल उमर के गले की हड्डी बना हुआ है CAA और NRC के खिलाफ फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगे, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई, 700 से ज्यादा लोग जख्मी हुए. इसमें उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत मिलने के कोई आसार दिख नहीं रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील ईमाम को इस मामले में एक साल तक जमानत याचिका दाखिल करने से भी रोक दिया. हालांकि अदालत ने इसी मामले में 5 अन्य आरोपियों- गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, मोहम्मद समीर खान, शादाब अहमद और शिफाउर रहमान को 12 शर्तों के साथ जमानत दे दी.

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