मुंगेर नेशनल हॉस्पिटल में पैसों के लिए काट दिया मरीज का पैर, फिर 3 लाख के लिए 13 दिन तक मां और पत्नी को किया कैद
Munger Crime News: बिहार के मुंगेर नेशनल हॉस्पिटल में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है, जहां सड़क हादसे में घायल युवक का पैर कथित तौर पर पैसों के लालच में काट दिया गया. आरोप है कि इलाज के नाम पर लाखों रुपये वसूले गए और अतिरिक्त 3 लाख रुपये के लिए मरीज की मां और पत्नी को 13 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया. फिलहाल डीएम के आदेश पर मामले की जांच शुरू हो चुकी है. जानिए पूरी कहानी.

इस देश में डॉक्टर को धरती के भगवान के रूप में दर्जा प्राप्त है लेकिन कुछ डॉक्टर चंद पैसों की लालच में इतने हैवान बन जाते हैं कि यह सोचकर ही आप सिहर उठेंगे. दरअसल एक ऐसा ही मामला बिहार के मुंगेर के कोतवाली थाना क्षेत्र इलाके से सामने आया है. यहां तोपखाना बाजार स्थित मुंगेर नेशनल हॉस्पिटल में एक सड़क दुर्घटना में घायल युवक का दाहिना पैर काट दिया और चार लाख वसूल लिए. डॉक्टर का इसके बाद भी जब मन नहीं भरा तो दो लाख 90 हजार रुपए की डिमांड कर दी.
लेकिन जब परिजनों ने पैसे नहीं होने की बात बताई तो अस्पताल के संचालक ने जख्मी युवक की कभी मां को तो कभी पत्नी को बंधक के रूप में करीब 13 दिन तक रखा. वहीं किसी तरह से डीएम को इस बात की जानकारी मिली तो मामले की गंभीरता को देखते हुए युवक को मुक्त कराकर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. अब इस मामले में डीएम निखिल धनराज निप्पणीकर ने आपदा प्रबंधन के अपर समाहर्ता संजय कुमार सिंह के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है और जांच की जा रही है. आइए विस्तार से जानते हैं इस मामले की पूरी कहानी.
वाहन के टक्कर से टिंकू को लगी चोट
दरअसल लखीसराय जिले के मेदनी चौकी के रहने वाले महेश साहू का 35 वर्ष के पुत्र टिंकू साव 24 नवंबर 2025 को रोज की तरह अपने साइकिल पर बर्तन रखकर बेचने के लिए निकला था. हेमजापुर थाना क्षेत्र के शिवकुंड के समीप एक वाहन ने उसे धक्का मार दिया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. स्थानीय लोगों ने उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल मुंगेर में भर्ती कराया जहां उसका प्राथमिक उपचार किया जा रहा था और उसी समय परिजन भी पहुंचे.
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इतने में ही डॉक्टर ने कहा कि इस पटना लेकर चले जाइए और फिर चार लड़कों ने मिलकर उसे एक एंबुलेंस में डाला और पटना की जगह सीधे नेशनल हॉस्पिटल, मुंगेर पहुंचा दिया. यहां इलाज शुरू होने के बाद रात करीब 12 बजे टिंकू साव के दाहिने पैर को काट कर अलग कर दिया गया.
टिंकू ने सुनाई पूरी कहानी
अब इस मामले में टिंकू ने हमारे संवाददाता से बातचीत करते हुए बताया कि, मेरा सदर अस्पताल मुंगेर में इलाज चल रहा था और नेशनल हॉस्पिटल में पैर काटने से पहले मुझे इंजेक्शन देकर बेहोश कर दिया गया. लेकिन इस दौरान टिंकू को कभी-कभी होश आता लेकिन एनेस्थीसिया की वजह से वह बार-बार सो जा रहा था. टिंकू ने आगे कहा कि, जब 5 दिन के बाद मुझे होश आया तो पता चला कि मेरा पैर काट दिया गया था. हम साइकल पर बर्तन रखकर गांव और गलियों में बेचने का काम करते हैं और मेरे ऊपर मेरी पत्नी चार बच्चे माता-पिता सहित 10 परिवारों के भरण पोषण की जिम्मेवारी थी.
'पैसों के लिए काटा मेरा पैर'- टिंकू
टिंकू ने आगे आरोप लगाते हुए कहा कि, नेशनल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने पैसे के लिए मेरा पैर काट दिया. क्योंकि वहां मौजूद डॉक्टर लोग बोल रहे थे कि अगर पटना चला जाता तो स्टील लग जाता और पैर काटने की जरूरत नहीं पड़ती. इन लोगों ने सिर्फ बिल बनाने के लिए मेरा पैर काटकर मुझे दिव्यांग बना दिया और अब हमारे परिवार का भरण पोषण कैसे होगा यही सोच-सोच कर हम परेशान हैं. उन्होंने अस्पताल पर कानूनी कार्रवाई करने और मदद करने की मांग की है.
4 लाख रुपए लिए, 3 लाख के लिए दी धमकी
वहीं इस मामले में पीड़ित युवक के पिता महेश साव ने बताया कि हम लोगों को बिना जानकारी दिए मेरे बेटे का पैर काट दिया गया. इसके बाद हम लोगों से 1,59,700 बेड चार्ज और डॉक्टर की फीस के रूप में लिया गया जबकि ढाई लाख रूपये के करीब दवा और सुई के नाम पर लिया गया. हम लोगों से अस्पताल में लगभग चार लाख रुपए लिए गए और बाद में दो लाख 90 हजार रुपए की डिमांड कर दबाव बनाने लगे. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पताल के संचालक ने साफ-साफ कह दिया की पहले बच्चे हुए पैसा जमा करिए तभी आपके बेटे को अस्पताल से छोड़ेंगे अन्यथा आपके परिवार के एक सदस्य अस्पताल में बंधक के रूप में रहेंगे.
13 दिन तक मां और पत्नी को बनाया बंधक
महेश साव ने बताया कि, चार लाख रुपए तो हम और हमारी पत्नी ने मिलकर मेदनी चौकी , सूर्यगढ़ा, परिवार और रिश्तेदारों से चंदा मांग कर और कुछ कर्ज लेकर अस्पताल वालों को दिए थे. इसके बाद हमारे पास और कोई चारा नहीं बचा था जिससे हम पैसों का इंतजाम कर पाते. इसके बाद हम 2 दिसंबर 2025 को मुंगेर के डीएम के यहां आवेदन दिए इसके बाद 3 दिसंबर की सुबह अधिकारी वहां पहुंचे और जांच पड़ताल की. फिर 7 दिसंबर को मेरे बेटे को वहां से मुक्त करा कर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. मिली जानकारी के मुताबिक 13 दिन तक नेशनल हॉस्पिटल वालों ने 13 दिनों तक टिंकू की मां और पत्नी को बंधक बनाकर रखा था.
महेश साव ने कहा कि, टिंकू को छोड़ने के लिए नेशनल हॉस्पिटल के द्वारा एक पेज पर मेरा ,मेरी पत्नी और बहु से दस्तखत और अंगूठे का निशान ले लिया गया, जिसमें यह लिखवाया गया था कि इलाज में कुल खर्च 3 लाख 68 हजार सात सौ रुपए हुए थे और उसमें मेरे द्वारा एक लाख 59 हजार सात सौ रुपए जमा किया गया है. इसके अलावा बाकी शेष राशि दो लाख 90 हजार रुपए अस्पताल प्रबंधन ने मानवीय आधार पर छोड़ दिया है और मुझे इलाज संबंधित कोई शिकायत नहीं है. उन्होंने बताया कि जो राशि मुझसे हॉस्पिटल में लिया गया था उसका जिक्र किया गया है जबकि दवा और सुई में दी गई राशि करीब ढाई लाख रुपए का कोई जिक्र नहीं किया गया था. उन्होंने मुंगेर जिला प्रशासन से दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.
सदर अस्पताल वाला डॉक्टर मुंगेर नेशनल हॉस्पिटल में भी करता है काम
आपको बता दें कि घटना के दिन जिस डॉक्टर ने सबसे पहले सदर अस्पताल में फर्स्ट एड दिया था वही डॉक्टर सदर अस्पताल के अलावा मुंगेर नेशनल हॉस्पिटल में भी ड्यूटी करता है. सदर अस्पताल में लगे डॉक्टरों की ड्यूटी रोस्टर और नेशनल हॉस्पिटल के बाहर लगाए गए बोर्ड में भी डॉक्टर रोशन का नाम है. वहीं सदर अस्पताल के बाहर निजी अस्पताल के एंबुलेंस हमेशा खड़े रहते हैं और कहीं ना कहीं सदर अस्पताल में डॉक्टर के साथ-साथ दलालों की मजबूत पैठ की वजह से भोले भाले मरीजों को बरगलाकर सरकारी अस्पतालों से निकाल कर निजी अस्पतालों में शिफ्ट कराया जाता है जहां उनसे पैसे ऐंठने और पैसे नहीं देने पर बंधक भी बनाया जाता है.
यहां देखें वीडियो
इनपुट- गोविंद कुमार
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