Ankita Bhandari Case: कौन हैं डॉ. अनिल प्रकाश जोशी? अंकिता भंडारी हत्याकांड में जिनकी FIR के बाद पूर्व सीएम हरिश रावत ने उठाए सवाल

Who is Anil Prakash Joshi: अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI जांच के ऐलान के बावजूद उत्तराखंड में गुस्सा शांत नहीं हुआ है. न्याय की मांग को लेकर राज्य में बंद का ऐलान हुआ है. इसी बीच पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की FIR, VIP एंगल और हरीश रावत के सवालों ने इस मामले को फिर से सियासी और सामाजिक बहस के केंद्र में ला दिया है.

Ankita Bhandari murder case
पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने दर्ज करवाई FIR
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Anil Prakash Joshi Kaun Hai: अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI जांच के ऐलान के बाद भी विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस मामले में न्याय की मांग को लेकर आज उत्तराखंड में बंद की घोषणा की गई है. इस बंद को कांग्रेस, उत्तराखंड महिला मंच, गढ़वाल सभा और उत्तराखंड क्रांति दल सहित कई संगठनों ने समर्थन दिया है. हालांकि कुछ व्यापारिक संगठनों ने इससे दूरी भी बनाई है. वहीं बंद को लेकर आई जी गढ़वाल ने लोगों से अपील की है कि प्रदर्शन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से किया जाए.

इन सब के बीच अब मामले में पर्यावरणविद पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की भी एंट्री हो गई है. उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर देहरादून के वसंत विहार थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है. इस पर अब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बयान भी सामने आया है.उनका कहना है कि FIR में अंकिता के माता-पिता के नाम से लिखी जानी चाहिए थी. इस सब के बीच चलिए खबर में जानते है कि कौन हैं पर्यावरणविद पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी.

डॉ. अनिल जोशी ने दर्ज करवाई FIR 

दरअसल, अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में पर्यावरणविद पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने देहरादून के वसंत विहार थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है. ये मुकदमा भारतीय न्याय संहिता की अलग अलग धाराओं के तहत दर्ज किया गया है. डॉ. जोशी का कहना है कि सोशल मीडिया और जनमानस में एक वीआईपी को लेकर लंबे समय से चर्चाएं चल रही हैं. इस रहस्यमयी व्यक्ति की पहचान उजागर करना और उसे जांच के दायरे में लाना राज्य की बेटियों की अस्मिता के लिए बेहद जरूरी है.

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FIR में क्या लिखा गया है?

पर्यावरणविद् और पद्म भूषण सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के द्वारा दर्ज FIR में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्ट्स, सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो-वीडियो और आम जनता के बीच चल रही चर्चाओं में यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कुछ अज्ञात लोग शामिल थे जिनका VIP के नाम से उल्लेख किया जा रहा है. हालांकि, FIR में कहा गया है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल आरोपियों को सजा दी जा चुकी है. लेकिन सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर दावा किया जा रहा है कि मामले से जुड़े कुछ अहम सबूतों को छिपाया गया या नष्ट किया गया.

ऐसे में डॉ. अनिल जोशी ने अपनी शिकायत में कहा है कि VIP कहे जा रहे इन अज्ञात व्यक्ति या व्यक्तियों से जुड़ा यह एक अलग और स्वतंत्र अपराध हो सकता है. इसकी जांच के लिए जरूरी है कि इस पूरे मामले के तथ्यों को सामने लाने के लिए एक अलग, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो. शिकायत में मांग की गई है कि इस मामले को FIR के रूप में दर्ज किया जाए और किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से इसकी जांच कराई जाए ताकि अंकिता भंडारी मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर पूरी तरह से सच्चाई सामने आ सके.

आईजी गढ़वाल ने क्या कहा?

आईजी गढ़वाल रेंज राजीव स्वरूप ने प्रेस वार्ता में बताया कि डॉ. अनिल जोशी के द्वारा दर्ज कराई गई FIR के आधार पर ही सीबीआई अपनी आगे की कार्रवाई शुरू करेगी. शासन स्तर से इस मामले की पूरी रिपोर्ट केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई है. पुलिस विभाग का कहना है कि वे अंकिता को न्याय दिलाने के लिए गंभीर हैं और समाज में फैले असमंजस को दूर करने के लिए सीबीआई जांच सबसे बेहतर विकल्प है. 

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उठाए तीखे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने डॉ. अनिल जोशी के कदम का स्वागत तो किया लेकिन यह भी कहा कि FIR अंकिता के माता-पिता के नाम से दर्ज होनी चाहिए थी. रावत ने अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह के एक ऑडियो का हवाला देते हुए मांग की कि सरकार उन्हें कानूनी सहायता दे और सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच सुनिश्चित करे ताकि वीआईपी का राज खुल सके. यहां क्लिक कर पढ़ें सीबीआई के ऐलान के बाद अंकिता ने पिता ने क्या कहा था.

कौन हैं पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी?

डॉ. अनिल प्रकाश जोशी देश के जाने-माने पर्यावरणविद और हेस्को (HESCO) के संस्थापक हैं. पिछले चार दशकों से हिमालयी क्षेत्रों में विकास और संरक्षण के लिए काम कर रहे डॉ. जोशी को भारत सरकार ने पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे नागरिक सम्मानों से नवाजा है. उन्हें 'माउंटेन मैन' भी कहा जाता है. समाज सेवा में उनके योगदान को देखते हुए उनके द्वारा दर्ज कराई गई इस शिकायत को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है.

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