निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री अब क्यों बन गई है जदयू की मजबूरी? क्या नीतीश कुमार लेने जा रहे ये बड़ा फैसला
Nishant Kumar political entry: बिहार की राजनीति में बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या नीतीश कुमार अब अपने बेटे निशांत कुमार को राजनीति में उतारने जा रहे हैं? पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की मांग है कि निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री अब जदयू की मजबूरी बन चुकी है. जानिए क्यों निशांत कुमार को लेकर दबाव बढ़ा, किस भूमिका में हो सकती है एंट्री और क्या नीतीश कुमार लेने वाले हैं बड़ा फैसला.

Nishant Kumar News: यूं तो नीतीश कुमार कई बार अपने बयान, मंच पर अजीब हरकतों से विवादों में रहें, लेकिन हिजाब कांड ने उनकी छवि को और खराब करने में बड़ी भूमिका निभाई है. हिजाब कांड ने इस सवाल को फिर ताजा कर दिया है...क्या नीतीश कुमार अस्वस्थ है और क्या बढ़ती उम्र का असर उनपर हावी हो रहा है? इसी बीच निशांत कुमार की एंट्री की सुगबुगाहट भी तेज हो गई. जदयू नेताओं के एक बड़े तबके का मानना है कि अब निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री होनी चाहिए और नीतीश कुमार के बाद वहीं पार्टी के लिए जरूरी और मजबूरी दोनों ही है. यही वजह है कि पार्टी के अंदर बार-बार निशांत को राजनीति में लाने के लिए मांग उठ रही है.
जल्द ही हो सकता है बड़ा ऐलान
नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार उठाई जा रही मांग की वजह से कहा जा रहा है कि जल्द ही निशांत पार्टी और राजनीति दोनों में एक्टिव हो सकते है. जदयू सूत्रों की मानें तो दिल्ली में इसी साल मार्च महीने में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी. इसी बैठक से निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बड़ा ऐलान हो सकता है. वहीं यह बात भी सामने आई है कि जदयू निशांत कुमार के लिए उनकी विरासत के मुताबिक ही पद चाहती है ताकि कार्यकर्ताओं को भी न्याय मिल सकें.
किस रोल में नजर आ सकते हैं निशांत कुमार?
सूत्रों की मानें तो पार्टी के पास निशांत कुमार को लेकर फिलहाल 2 विकल्प है:
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पहला विकल्प: निशांत कुमार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाना(इससे पार्टी के महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी भूमिका रहेगी)
दूसरा विकल्प: पार्टी का महासचिव बनाकर संगठन की बारिकियों से रूबरू कराना और पूरे बिहार का दौरा कराना.
जदयू के बड़े नेताओं का मानना है कि निशांत कुमार भले ही राजनीति में कम एक्टिव है लेकिन फिर भी युवाओं में उनका क्रेज देखने को मिला है. पटना समेत कई जिलों में निशांत कुमार के समर्थन में लगे पोस्टर-बैनर, नारेबाजी और सोशल मीडिया अभियान से यह बातें सामने दिखी भी है. पटना के चौराहों पर आए दिन निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री और पार्टी का भविष्य बताते हुए पोस्टर-बैनर देखने को मिल जाते है.
निशांत की सक्रियता और संजय झा का बयान
निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर हवाएं तब उठी जब चुनाव से अचानक पहले वो एक्टिव हो गए. जो निशांत कभी मीडिया के सामने तक नहीं आते थे, वो मीडिया से बातचीत करने लगे, सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखने लगे और चुनाव के बाद भी वे इसी अंदाज में नजर आए. जब नीतीश कुमार बिहार में 10वीं बार मुख्यमंत्री पद का शपथ ले रहे थे तब भी निशांत सबसे आगे की लाइन में बैठे हुए थे.
वहीं जदयू कार्यकर्ताओं की इस मांग को जदयू के ही कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के बयान ने ही सपोर्ट किया. संजय झा ने साफ कहा था जदयू कार्यकर्ता निशांत कुमार को पार्टी में चाहते हैं पर इस बारे में फैसले निशांत कुमार को खुद करना है. लेकिन अगर देखा जाए तो बात पूरी तरह ऐसी नहीं है क्योंकि यह फैसला नीतीश कुमार के हाथ में ही है.
नीतीश कुमार अब भी परिवारवाद के खिलाफ
भले ही लोग नीतीश कुमार की उम्र और स्वास्थ्य को लेकर कितना भी कटाक्ष कर लें लेकिन नीतीश परिवारवाद के खिलाफ आज भी डटे हुए है. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जब कुछ नेताओं ने निशांत कुमार को नालंदा सीट से चुनाव लड़ाने की बात कही तो नीतीश कुमार ने साफ इनकार कर दिया था. वहीं जदयू नेताओं का यह भी कहना है कि अगर नीतीश को निशांत कुमार को ही उत्तराधिकारी बनाना होता तो वे इसलिए वे उन्हें तैयार करते लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया है. साथ ही उन्होंने कोई संकेत भी नहीं दिया है.
निशांत कुमार क्यों मजबूरी?
पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि जदयू की पहले और अब के हालात में काफी अंतर है. अगर जदयू को आगे भी यानी नीतीश कुमार के बाद भी एकजुट रखना है तो उन्हें परिवार से ही किसी को लाना पड़ेगा. अगर ऐसा नहीं होता है तो नीतीश कुमार के बाद पार्टी पूरी तरह बिखर जाएगी. वहीं पहले नीतीश ने आरसीपी सिंह को अपने उत्तराधिकारी के रूप में आगे बढ़ाना शुरू किया था लेकिन वह उम्मीदों पर खड़े नहीं उतरे.
ऐसे हालातों में पार्टी अब निशांत कुमार के अलावा किसी और को मंजूर करने के मूड में नहीं है. पार्टी नेताओं का साफ कहना है कि अब और देर करना सही नहीं है और इन्हीं वजहों से हो सकता है कि नीतीश कुमार अपने इसी कार्यकाल में निशांत कुमार को अपना उत्तराधिकारी बना सकते है.
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